भगवान बुद्ध का पवित्र स्थान सारनाथ सोमवार को आम पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। इस पुरातात्विक स्थल को देखने के लिए ई-टिकटिंग की व्यवस्था की गई है। आने वाले पर्यटकों का विवरण भी नोट किया जा रहा है। गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग, स्वच्छता के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। लोगों के बीच दूरी बनाए रखने के लिए, एक सुरक्षा घेरा बनाया गया है। बता दें कि भगवान बुद्ध ने पहली बार अपने चार शिष्यों को इस शांति का उपदेश दिया था। बौद्ध अनुयायियों का सबसे बड़ा तीर्थस्थल सारनाथ है।
600 करोड़ के टर्नओवर को हुआ नुकसान
आम तौर पर यहां सबसे अधिक विदेशी पर्यटकों की संख्या यहां होती है। इसके ख्रुल जाने से पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, ऐसी संभावना जताई जा रही है। वाराणसी टूरिज्म एसोसिएशन के महानगर अध्यक्ष प्रणय रंजन सिंह ने बताया कि लॉकडाउन और अनलॉक में करीब 600 करोड़ के टर्न ओवर का नुकसान ट्रेवल, होटल, टेक्सटाइल समेत अन्य इंडस्ट्रियों को केवल टूरिज्म की वजह से हुआ है। 2019 में वाराणसी में इन तमाम इंडस्ट्रियों ने करीब 1200 करोड़ का टर्न ओवर किया था।
सारनाथ खुलने से टूरिज्म इंडस्ट्री में जान आएगी
प्रणय रंजन सिंह ने बताया कि 30 हजार व्हीकल काशी में है। जिसमें बस, कार, टेंपो ट्रेवलर अन्य गाड़ियां हैं। वहीं 250 से ज्यादा छोटे बड़े होटल, गेस्ट हाऊस होंगे। विदेशों और साउथ से आने वाले पर्यटक सबसे ज्यादा सारनाथ घूमना चाहते हैं।
पुरातात्विक परिसर को पर्यटकों के लिए खोला गया
सारनाथ स्थित म्यूजियम, चौखंडी स्तूप, सीता रसोई, धम्मेखा स्तूप, मूलगंध कुटीर विहार को चरणबद्ध तरीके से खोलने की तैयारी है। अभी दूर से ही इसे देखा जा सकता है। सारनाथ पुरातात्विक परिसर घूमने के लिए आने वाले लोगों को ई-टिकट लेना पड़ रहा है। हालांकि पहले सारनाथ मार्ग पर 40 से ऊपर छोटे बड़े क्राफ्ट, कपड़े, फूड समेत तमाम स्टाल दिखाई पड़ते थे। लेकिन आज भी यहां सन्नाटा पसरा है। बड़ी बसें, कारें, ऑटो तमाम वाहन बाहर दिखाई पड़ते थे। वो भी पर्यटकों के न होने से नदारद दिखे।
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